डेक्कन राजा की कहानी

राजा रानी की कहानी तो आपने बहुत सुनी होगी मगर हमारी इस राजा रानी की कहानी आपको moral सीख भी देती है | दोस्तों मै आज आप को एक ऐसी ही कहानी डेक्कन के राजा की  कहानी बताउंगी जिसका moral ये है की सदा हमें अच्छे कर्म करने चाहिए और फल के बारे में नहीं सोचना चाहिए क्यूकि फल हमेशा ऊपर वाला अच्छा ही देता है और अगर कभी इम्तेहान लिया तो कुछ समय के बाद उसका फल मीठा ही देगा| तो आइये पढ़े ये कहानी |

 इस संसार में ईश्वर ने जितनी भी चीजें बनाई है उन सभी की अपनी अपनी महत्तवता है,तो आइये जाने इस गुलाबी फुल की कहानी को |

राजा डेक्कन

यह कहानी यूरोपीय देश के उत्तर-पश्चिमी प्रांत के एक छोटे से राज्य की है जहां पर राजा डेक्कन राज  करते थे उनके राज्य में सभी नागरिक राजा डेक्कन के कार्य से खुश थे राजा डेक्कन हर तरफ से सुख एवं समृद्ध थे बस उन्हें एक ही चिंता थी कि उनका कोई संतान नहीं था उन्होंने अपनी रानी के इलाज के लिए दूसरे राज्यों से चिकित्सक वैध एवं हकीम बुलाए पर किसी के इलाज से उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई राजा की चिंता बढ़ती जा रही थी पर कोई हल नहीं निकल पा रहा था|

उधर रानी भी  चिंतित रहने लगी जिसके कारण उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी एक दिन सुबह सुबह जब रानी अपने बाग में टहल रही थी तभी एक पेड़ से कुछ आवाज सुनाई दी रानी ने जब मुड़कर देखा तो शायद कोई उन्हें संबोधित करके बुला रहा था पर इधर-उधर देखने पर जब कोई नहीं दिखा तो वह आगे बढ़ गई| दूसरे दिन जब रानी बाग में टहल रही थी तभी फिर से वही आवाज सुनाई दी रानी फिर इधर उधर मुड़ कर देखी तो उन्हें  कुछ नहीं दिखाई दिया तभी लगा पास वाले पेड़ से आवाज आ रही थी रानी पेड़ के पास गई तो देखा सच में पेड़ से ही आवाज आ रही थी रानी ने पेड़ से पूछा तुम कौन हो और तुम इंसानों के जैसे कैसे बोल सकते हो पेड़ से आवाज आई महा रानी दरअसल मैं एक परी हूं यहाँ  पेड़ के अंदर मै  सालों से कैद हूँ मुझे एक दानव ने यहां कैद किया है और मुझे श्राप  दिया है कोई बिन संतान वाली रानी  जब इसी रास्ते से निरंतर 100 दिन तक गुजरेगी तो ही तुम इस पेड़ से बाहर आ पाओगी और जब वह इस पेड़ को जोर-जोर से हिलाएगी  और कहेगी कि “आज तुम बाहर आ जाओ यह रंगीन दुनिया बाहें फैलाए तुम्हारा इंतजार कर रही है”| रानी आप ही मुझे इस श्राप से मुक्त कर सकती हैं|कृपा करके मुझे यहाँ से बाहर निकाले|                       

 रानी बहुत दयालु और अच्छे व्यक्तित्व की  धनी थी  उन्होंने फौरन ही परी को श्राप से मुक्त कर दिया परी ने बाहर आकर दिल से उनका शुक्रिया अदा किया और जाते-जाते परी ने दुआ दी जल्द ही इस राज्य में उत्तराधिकारी आएगा बस आप 10 दिन तक राजा डेक्कन को बोलना के पास वाले गांव में एक छोटा सा तालाब है जिसका पानी का रंग हल्का गुलाबी है, उसका पानी मीठा भी है उसमें एक गुलाबी फूल ठीक सूर्योदय के आधे घंटे तक खिलता है उसी समय रोज सुबह उसे तोड़कर लाना और आपको प्रात: काल में उसे खा लेना है और किसी से 2 घंटे तक कोई बातचीत नहीं करनी है अवश्य भगवान की कृपा से आप मां बन जाएंगी इसके बाद परी वहां से चली जाती है |                    

रानी ने ठीक वैसा ही किया जैसा की परी ने उन्हें बताया था राजा डेक्कन खुद एक गुलाबी फुल रोज प्रात: काल  तोड़ कर लाते और रानी उसे खालेती थोड़े ही दिनों में रानी की गोद भर गई महल में चारों तरफ खुशियों की लहरफ़ैल गई  राजा भी बहुत खुश थे| जल्द ही रानी ने  दो जुड़वां बच्चे को जन्म दिया एक लड़का और एक लड़की राजा डेक्कन यह सब देखकर बहुत प्रसन्न हुए वे मन ही मन ईश्वर का धन्यवाद किये अब राज्य में चारो ओर खुशहाली थी राजा और प्रजा नन्हे उत्तराधिकारीयों को पा कर बहुत ख़ुश थे|

जन्म के पश्चात ही वह परी वहां फिर आती है और दोनों बच्चों को वरदान देती है राजकुमार को वरदान मिलता है के उनके शासन काल में चारो वोर सुख एवं समृधि रहे गी पर अगर उनके शासन काल में अगर कोई भी अनजाने से ही सही दुखी हुआ तो आप को बहुत बड़ी विपदा का सामना करना पड़े गा एवं राजकुमारी को ये वरदान मिला की ये अत्यंत सुंदर एवं शुशील होगी और हर बढ़ते दिन के साथ इनकी सुन्दरता बढ़ती  जायेगी  और इनका चहरा उसी गुलाबी फुल की तरह गुलाबी और चमकदार हो जायेगा इतना की रात को  कोई भी चीज देखने के लिए किसी भी चीज की आवशयकता नहीं होगी ,आशीर्वाद देने के बाद परी वहां से चली जाती है थोड़ी ही देर में वहां बुरी परी आजातीहै और वो ये श्राप देती है की आप किसी भी चीज को छुओ गी तो वह पतथर का बन जाये गा लेकिन ये आप के दसवे साल गिरह के दिन से होगा ,इतना कह कर बुरी परी वहां से चली जाती है |

धीरे धीरे वक़्त गुजरता गया राज महल में सब खुश थे , फिर वह दिन भी आया जब राजकुमार और राजकुमारी दोनों 10 साल के होगये, सुबह होते ही बधाईयों का सिलसिला शुरू हो गाया जैसे ही राजकुमारी अपने माता पिता का आशीर्वाद लेती है तो रानी और डेककन राजा दोनों पत्थर के बन जाते है ये देखते ही चारो तरफ भय फ़ैल जाता है राजकुमारी रोने लगती है तभी राजकुमार उन्हें आकर समझाते है हमें रोना नहीं चाहिए राज कुमारी, बल्कि साहस से काम लेना चाहिए तभी राजकुमार राजकुमारी के कंधे पर हाथ रखते है|राजकुमारी ने ये देखा की उनका भाई बिलकुल ठीक है उन्हें कुछ नहीं हुआ, कुछ देर के बाद जब वे खुद को अकेला महसूस कर रही थी तो उन्हों ने बड़े प्यार से अपनी प्यारी बिल्ली को उठाकर अपने गोद  में रखा तो  अचानक वह बिल्ली भी पत्थर की बन जाती है ये देख कर वह बहुत डर जाती है |

लेकिन उन्हें ये बात समझ में आजाती है की अगर वो किसी चीज को छुएगी तो वह पत्थर का बन जायेगा दिन गुजरता गया और हर दिन राज्य में कोई ना कोई चीज पत्थर का बन जाता था |राजा की अनुपस्थिति में राज्य का सारा कार्य प्रधानमंत्री और राजकुमार के आपसी  सहमति से हो रहे  थे  इस मोके का फायेदा उनके दुश्मनों ने उठाना शुरू कर दिया था |ये सब देख कर राजकुमार बहुत चिंतित रहने लगे थे ,एक दिन अचानक से वो परी डेक्कन राजा और रानी से मिलने के लिए आती है यहाँ आकर यहाँ के हाल देख कर वह बहुत परेशान हो जाती है | सारा हाल राजकुमार से पूछने के बाद वो इस श्राप से मुक्त होने का समाधान बताती है |              

 इस श्राप से मुक्त होने केलिए राजकुमारी को 16 साल का होना आवशयक है  और वही गुलाबी फूल को जब इस का होने वाला राजकुमार इसे लाकर खिलायेगा और जैसे ही इसके हाथों को चूमेगा राजकुमारी श्राप मुक्त हो जाएगी |उसके बाद राजकुमारी अपने अश्पर्ष से सभी को पुनः पहले जैसा कर देंगी ये वरदान दे कर परी वहां से चली जाती है |वक़्त गुजरता गाया और देखते ही देखते राजकुमारी 16 साल की हो गई एक दिन अचानक एक राजकुमार राजकुमारी से शादी की इच्छा ले कर आता है वह उनके पिताजि के मित्र का बेटा था और होनहार भी था इस कारण राजकुमार ने इस रिश्ते को मंजूर कर लिया, जैसे ही वह राजकुमारी को फुल खिलाता है और उसके हाथों को चूमता है राजकुमारी श्राप मुक्त हो जाती है| उधर राजा रानी राजकुमार का राजतिलक कराते है और सभी लोग हसी ख़ुशी  से रहने लगते है |

देखा दोस्तों हमें अच्छे कर्म करना चाहिए क्यूंकि उसका फल हमेशा अच्छा ही होता है इसलिए सदैव हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए|

 

 

Leave a Reply