भूत वाली हवेली

भूत वाली हवेली कहानी पुर्णतः काल्पनिक है इसमें वर्णित सभी स्थान और घटनाएं काल्पनिक है तथा इसके सभी मनुष्य पात्र और भूत भी काल्पनिक है इस कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन है|

भूत वाली हवेली

सेठ काशी व्यापर के सिलसिले में गया से तेलो नगर पचासों बार अये गये पर उस हवेली की तरफ उनका ध्यान ही नहीं गया था अब जब देखा तो देखते रह गए झारखण्ड के पठारी मैदान  के निकट इतनी सुंदर और विलक्षण जगह का होना चमत्कार से कम ना था ऊंचे और घने पेड़ों से घिरे पत्थरों में उकेरी गई कलाकृतियों में बड़े-बड़े झरोखों से युक्त बड़ी और ऊंची हवेली ने सेठ का मन मोह लिया सेठ ने ऊंट गाड़ीवान से गाड़ी हवेली के नजदीक ले चलने को कहा मुख्य मार्ग से हवेली तक  ईंट और पत्थर के टुकड़े बिछाकर मार्ग बनाया गया था | गाड़ीवान थोडा झिजका फिर उसने ऊंटगाड़ी को हवेली की ओर मोड़ दिया | वे थोड़ी ही दूर चले ही थे की शायद गाड़ी के पहियों के चलने और ऊंट के गले में बंधी घंटियों की आवाज हवेली तक पहुंच गई थी अचानक सैकड़ों चमगादड़ हवेली के झारोखों और रोशन दान से निकल कर आसमान में चक्कर काटने लगे | साथ ही हवेली के दरवाजे के एक टूटे हुवे हिस्से में पड़ी एक बड़ी दीवार में से आठ दस कुत्तों का झुंड निकलकर भागा | सेठ समझ गाया की हवेली काफी दिनों से खाली पड़ी होगी |  उसने गाड़ीवान से नगर में चलने को कहा |

सेठ अपने परिवार की परंपरा के अनुसार व्यापार का विस्तार करना चाहता था उसने इस मंशा से तेलो नगर में कपड़ों की दुकान खोली थी और वह तेलो नगर में एक निवास स्थान भी बनाना चाहता था उसे हवेली बहुत पसंद आ गई थी | उसका अपना परिवार तो छोटा ही था लेकिन खानदान बडा था | हवेली भविष्य में और लोगों की भी काम आ सकती थी सेठ ने हवेली के मालिक का पता लगाया और हवेली खरीदने की इच्छा व्यक्त की हवेली का मालिक तुरंत बेचने को तैयार हो गया और दाम भी कम लगाया किंतु सौदा होने के पहले उसने सेठ से कहा आपको एक बात बता दूं कुछ लोग उसे भूत हवेली कहते हैं बहुत कम दाम में एक शानदार हवेली मिल रही थी अतः उसने किसी बात पर ध्यान नहीं दिया और हवेली खरीद ली| सेठ ने हवेली की मरम्मत सफाई रंगाई पुताई सब करवाया और सपरिवार उसमें रहना प्रारंभ कर दिया सेठ का नाम सेठ काशी था उसके परिवार में उसकी पत्नी सुधा और एक 8 साल की बेटी लक्ष्मी थी वास्तव में वह एक भूतहा हवेली थी स्थानीय जनता के मन में इसके प्रति इतना भय समाया था कि उनकी हिम्मत तो हवेली के पास से गुजरने की भी नहीं होती थी परदेसी सेठ के मन में भय नहीं था क्योंकि उसने हवेली की डरावनी कहानियां नहीं सुनी थी इतनी सुंदर हवेली कम दाम में खरीद कर वह खुस था | हवेली का पुराना मालिक हवेली बेच कर खुस था | उसने सेठ को यह बात बताकर ही हवेली बेची थी कि लोग उसे भुतहा हवेली कहते हैं |

सेठानी सुधा घर का सारा कार्य खुद ही करती थी| हवेली के आंगन में एक कुंवा था | सुधा बर्तन मांजने और कपड़े धोने का कार्य कुंवे से पानी खींच कर कुएं के पास बैठकर करना पसंद करती थी | कुंवे को सुरक्षा के लिए एक पक्की मुंडेर से घिरा हुआ था एक  दिन सुधा ने धुलने वाले कपडे कुंवा के पास एक ओर रख दिए और कुंवे से बाल्टी से पानी निकालना शुरू किया | उसके बाद वह बर्तन मांजने में व्यस्त हो गई बीच में किसी महिला की चूड़ियां खनक ने की आवाज आई सुधा ने देखा तो चौक गई एक गोरे रंग की लगभग 30 साल की सुंदर युवती जिसने सफेद साड़ी पहनी हुई थी | सुधा के वहां रखे कपडे को धो रही थी| सुधा ने सोचा सेठजी ने कोई नौकरानी उसकी मदद के लिए भेजी है | सुधा ने उस युवती से पूछा तुम्हे किसने भेजा है और तुम कब आयी| वो बोली तुम्हे अकेला काम करते देख मैं खुद ही चली आई | उसकी असलियत तब समझ में आई जब काम खत्म हो जाने पर वह सुधा से बोली अच्छा मै कल फिर आउंगी | अभी मै चलती हूँ इसके बाद सुधा जबतक कुछ कह पाती वह छपाक से कुएं में कूद गई | सुधा ने डरकर कुएं में झांका तो पानी शान था जैसे कुछ हुआ ही नहीं था सुधा समझ गई कि वह भूतनी थी दूसरे दिन सुधा जब कुए पर बर्तन और कपड़े धोने आई तो गोरी वाली भूतनी कुंवे से निकल कर आ गई उसने सुधा का आधा काम कर दिया तभी वहां सुधा की बेटी लक्ष्मी आ गई तो वह भूतनी गायब हो गई थोड़ी देर में बेटी वापस चली गई तो वह फिर से प्रकट हो गई सुधा ने पूछा तुम कहां गायब हो गई थी गई थी|

सुधा ने पूछा तुम कहां गायब हो गई थी अदृश्य हो गई थी कि तुम्हारी बेटी कहीं मुझसे डर ना जाए सुधा ने कहा तुम तो रूप और स्वभाव कि इतनी अच्छी हो तुमसे उसे क्यों डर लगेगा| गोरी भूतनी बोली कुछ लोग भूतों के नाम से ही डर जाते हैं कुछ दुष्ट भूतों के कारण सारे भूत बदनाम हो जाते हैं अभी सुधा के परिवार को यह नहीं पता था कि बहुत वर्षों से हवेली खाली पड़ी थी और वहां कोई आता भी नहीं था इसलिए सारी बस्ती की भूत उसी हवेली में इकट्ठे हो गए थे ज्यादातर भूतों को इस छोटे से परिवार के आ जाने से कोई दिक्कत नहीं थी| हवेली में बहुत जगह थी | चार भूत ऐसे थे जिन्हें मनुष्य पसंद नहीं थे उन्होंने सोचना प्रारंभ कर दिया था कि इन मनुष्यों को कैसे भगाएं वो ये जानते थे कि हवेली के बाकी भूत उनका साथ नहीं देंगे अतः वह सिर्फ अपने गुट में ही चुपके से इस विषय पर बात करते थे अधिकांश भूत इस परिवार के वहां आने से इसलिए भी प्रसन्न थे कि इनको देखकर उन्हें अपने पुराने दिन याद आते थे जब वे भी मनुष्य थे वे इन लोगों से मित्रता करना चाहते थे लेकिन वो डरते थे की कहीं ये लोग डर ना जाए और डर के मारे हवेली ना छोड़ दे|हवेली के भूतों में कई तरह के भुत थे जैसे नेता वकील, टीचर, चोर, पुलिस, दुकानदार इत्यादि इनमें भूतनियां भी शामिल थी | चार भुत चोर भुत थे जो सेठ के परिवार को भागना चाहते थे उन्होंने सबसे पहले लड़की को सताने डराने की सोची  लक्ष्मी कमरे में अकेले बैठी पढ़ रही थी चोर भुत उसके कमरे में गए इतनी प्यारी लड़की को देखकर उनका मन उसको तंग करने का नहीं हुआ पर एक चोर भूत ने कहा हम लोग बेकार में भावुक हो रहे हैं याद रखो वो एक मनुष्य है और मनुष्य हमारे दुश्मन हैं चोर भूतों में एक बौना था, एक लम्बा,एक मोटा और एक लंगड़ा भुत था सभी अदृश्य थे | सबसे पहले बौने भूत ने जाकर लक्ष्मी के हाथ से पुस्तक खींचकर जमीन पर गिरा दी लक्ष्मी को लगा जैसे किसी ने उसके हाथ से किताब खींची थी लेकिन वहां कोई नहीं था उसने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया तभी टीचर भूतनी उधर आ गई टीचर भूतनी हर समय अपने हाथ में लिखने वाली चौक और दूसरे हाथ में लकड़ी का स्केल रखती थी वो लक्ष्मी को पढ़ते हुए देखकर बहुत खुश हुई और वहां चोरों को देखकर उसने उनको डाँटा तुम लोग यहां क्या कर रहे हो अगर लड़की की पढ़ाई में डिस्टर्ब किया तुम चारों को चार-चार स्केल मारूंगी और तुम सब को मुर्गा बना दूंगी ये सुनकर वो चारों वहां से भाग गए | लक्ष्मी को ना कुछ सुना और ना कुछ दिखाई दी वो पढ़ती रही |

रात में चोर भूतों ने सेठ को तंग करने का विचार बनाया | सेठ ने दूकान से लौटकर रुपयों से भरा बैग एक अलमारी के सबसे ऊपर वाले खाने में रख दिया और हाथ मुंह धोने कुए पर चला गया इस बीच लंबे भूत ने वह बैग ऊपर के खाने से उठाकर नीचे के खाने में रख दिया सेठ ने वापस आकर रुपए गिनने के लिए अलमारी के ऊपरी खाने में से बैग लेना चाहा लेकिन बैग  वहां नहीं था सेठ आश्चर्य में पड़ गया उसने पूरी अलमारी में खोजा तो उसे नीचे के खाने में पर्स मिल गया | चारो भुत सेठ को  परेशान होता देखकर वहीं खड़े हंस रहे थे | तभी पुलिस वाला भूत उधर आ निकला वह समझ गया कि चोरों ने कुछ शरारत की है उसने चोर भूतों से कहा तुम लोगों ने किसी को परेशान किया तो मैं तुम्हें जेल में डाल दूंगा इतनी बड़ी हवेली है फिर भी तुम लोग इसी तरफ कियूं घूमते रहते हो चोर भुत बोले सॉरी | और इसी के साथ वो वहां से भाग गये | हवेली के बाहर पेड़ पर बैठ कर वे चारों चोर भूत चर्चा कर रहे थे| बौना भुत बहुत गुस्से में बोला हमने सुना था हमारे देश में लोकतंत्र है सब को आजादी है हवेली में नहीं है क्या अगले दिन चोर भूतों ने लक्ष्मी को डराने का निश्चय किया उसके लिए उन्होंने ब्यूटीशन चुड़ैल की मदद मांगी ब्यूटीशन कामिनी चुड़ैल बहुत खुश हुई | मन में वो विचार करने लगी भूतनियां आपने साज श्रृंगार पर जरा भी ध्यान नहीं देती बहुत दिनों से अपनी कला की प्रैक्टिस भी नहीं कर पाई थी अब मौका मिला है चुड़ैल ने चोर भूतों से पूछा बोलो कैसा सजाँऊ अमिताभ बच्चन बनाना है या शाहरुख खान या फिर कोई और | बौना चोर बोला हमें डरावना बना दो |कामिनी बोली तुम लोग तो पहले से ही डरावने दीखते हो | लम्बा भुत बोला तो आप हमें भयानक बना दो | ठीक है हवेली की  दीवार से सटा हुआ पीपल का पेड़ है आधा घंटे बाद वहां आ जाना आधा घंटे बाद चारों भूत पीपल के पेड़ के पास गए कामिनी सबसे ऊंची डाल पर बैठी थी उसका मेकअप बॉक्स बगल वाली डाल से लटका हुआ था | उसने  थोड़ी ही देर में चारों भूतों का चेहरा बदल दिया और फिर उन्हें आईना दिखाया अपनी खुद की भयानक शक्ल देख कर उनकी चीखें निकल गयी | लेकिन खुश हुवे |

वे लक्ष्मी को डराने के लिए बेसब्र हो रहे थे उस समय शाम होने वाली थी लंगड़े भूत ने ज्ञान दिया | रात हो जाने दो | मनुष्य रात और अँधेरे में ज्यादा डरते है | सब ने लंगड़े भूत की बात मान ली जब शाम ढल गयी और रात हो गई और हवेली की बत्तियां जल गयी | चारों भूत हवेली के उस हिस्से में आ गए जिसमें सेठ का परिवार रहता था सेठानी रसोई में खाना बना रही थी सेठ अपने बही खाते देख रहा था लक्ष्मी टीवी के सामने सोफे पर बैठकर टीवी में कार्टून शो देख रही थी चोर भूत भी लक्ष्मी के पीछे खड़े होकर कार्टून शो देखने लगे उन्हें वह कार्यक्रम अच्छा लगा काफी देर तक देखते रहे बौना भूत बोला हमलोग क्या यहाँ टीवी  देखने आये थे लम्बे भूत ने बोला लेकिन उसके पापा यहाँ है | मोटे भूत ने कहा तो क्या हुआ हम पापा को देखेंगे ही नहीं बौना भूत बोला तो ठीक है पहले मैं उसे डराता हूं मोटा भूत बोला हम सभी इतनी  मेहनत से तैयार होकर आए हैं हम सब एक साथ काम करेंगे इसके बाद वे चारों लक्ष्मी के सामने थोड़ी दूरी पर एक लाइन बनाकर खड़े हो गए बौने भूत ने गिनती गीनी | एक… दो… तीन… और चारों भूत एक साथ अपनी भयानक रूप में लक्ष्मी के सामने प्रकट हो गए इन्हें देखकर लक्ष्मी डर गई और अपने पापा के पास जाकर उनसे लिपट गई सेठ ने पूछा बेटी क्या हुआ लक्ष्मी ने कहा मैंने अभी अभी यहाँ चार भयानक भूत देखे | सेठ ने इधर उधर देखा और  लक्ष्मी से कहा मुझे तो कोई नही दिखता लक्ष्मी ने कहा लेकिन वो यहीं थे | कोई बात नहीं तुम मेरे पास इस कुर्सी पर बैठ जाओ सेठ ने अपने बगल वाली कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा लक्ष्मी वहां आकर बैठ गयी लेकिन इसके बाद उस दिन और कोई खास बात नहीं हुई सब लोग रात का खाना खाकर सो गए सेठ ने लक्ष्मी कि डरने वाली बात सेठानी को बता दी थी दूसरे दिन सुधा ने कुंवे वाली गोरी भूतनी को रात वाली घटना बताई गोरी ने तुरंत कहा

चोर होंगे सुधा बोली लेकिन वह अदृश्य कैसे हो गए गोरी ने कहा चोर भूत यहां चार चोर भूत है | वे  बदमाश है और मनुष्यों को नापसंद करते हैं उन्होंने ही बेटी को डराया होगा सुधा ने बोला वे फिर ऐसा करेंगे तो गोरी भूतनी ने कहा लक्ष्मी को बता देना हम भूत लोग खुद ही डरपोक होते हैं लेकिन कोई हमसे डरता है तो हम उसे और डराते हैं और अगर निडर होकर बच्चा भी हमें डांट दे तो हम भाग जाते हैं सुधा ने कहा सलाह के लिए धन्यवाद मनुष्य की तरह भूतों में भी सब प्रकार के भूत होते हैं | बातचीत करते-करते सुधा का काम खत्म हो गया गोरी भूतनी अपने स्थान पर चली गई सुधा हवेली के अन्दर आ गयी लक्ष्मी स्कूल से आ चुकी थी सुधा ने गोरी की बताई हुवी बातें लक्ष्मी को बताई सुधा सोची की कायर चोर छोटी लड़की को डराना चाहते हैं मेरे सामने आए तो ऐसी डांट लगाऊँगी की हमेशा याद रहे चारो चोर  अपनी  पिछली रात के कारनामे से बहुत खुश थे |

अगली रात उन्होंने सेठानी को डराने की योजना बनाई| सेठानी जब रात को किचन में  खाना बना रही थी चारों भूत अपनी भयानक  शक्लें बनाकर और काले लम्बे कुरते पेहन कर वहां पहुँच गये | चारों के चारों वहां सेठानी के पीछे खड़े हो गए सेठानी जब किसी काम से पलटी तो वह मुंह खोलकर अपने नकली चाकू जैसे दांत किटकिटाना ते हुए उन्हें डराने लगे उनकी कल्पना के विरोध सेठानी डरने के स्थान पर लोहे का चिमटा लेकर उन पर झपट पड़ी और चारों भूत वहां से सर पर पैर रखकर भागे| इसके बाद चोर भूतों ने हवेली के सेठ सेठानी और उनकी बेटी के रहने वाले हिस्से में आना बंद कर दिया शेष भूत भूतनीयों को सेठ के परिवार से कोई शिकायत नहीं थी |सेठ की परिवार को उनसे कोई शिकायत नहीं थी वह देखते भी नहीं थे और कोई शरारत भी नहीं करते थे गोरी भूतनी सिर्फ सेठानी के सामने आती थी उस हवेली में इंसान और भूत दोनों शांतिपूर्वक रहने लगे और अनगिनत वर्षों तक रहे |

तेलो नगर के लोग अपने आप और समाज से पूछते हैं मनुष्य और भूत एक साथ शांतिपूर्वक रह सकते हैं तो मनुष्य मनुष्य क्यों नहीं रह सकते कहानी के भूत गोलू मोनू और छुटकी अपनी गिनती बड़े बच्चों में करते थे वे तीनों अपने-अपने बिस्तरों पर अकेले अकेले सोने लगे थे और उन्हें डर भी नहीं लगता था उन्होंने खुद कह कर दादी से भूत की कहानियां सुनी थी दादी से भूत की कहानी सुनने के रोमांच का उन लोगों ने भरपूर आनंद लिया था और जाकर अपने बिस्तर पर लेट गए अब उनकी आंखों के सामने कहानी वाले भूत डरावने रूप में प्रकट होने लगे उनकी नींद गायब हो गयी | रात थोड़ी और गहराई और गली के आवारा कुत्तों ने भोकना शुरू किया तो तीनों की धड़कने तेज हो गई बच्चों ने अपनी अपनी रजाई से अपने आप को अच्छी तरह लपेट लिया उस समय रजाई उनकी सबसे बड़ी ढाल थी छुटकी ने गोलू से कहा भैया लाइट जला दो मुझे नींद नहीं आ रही है गोलू ने मोनू से कहा भैया छुटकी कह रही है लाइट जला दो तुम जला दो ना प्लीज…. तीनो ही लाइट जलाना चाह रहे थे किंतु एक तो ठंड बहुत थी और डर भी बहुत लग रहा था  इसलिए कोई रजाई से बाहर नहीं निकलना चाहता था छुटकी ने मोनू से पूछा क्या आपको डर लग रहा है मोनू को भी डर लग रहा था लेकिन वह बोला नहीं तो | छुटकी बोली तो लाइट जला दीजिए ना प्लीज आखिरकार मोनू ने बड़े होने का फर्ज निभाया उठकर लाइट चला दी और जल्दी से वापस रजाई में घुस गया लाइट भी कमाल की चीज है लाइट जलते ही बच्चों को डराने वाले सारे भूत भाग गए इसके बाद उन्होंने बहुत दिनों तक भूत की कहानी नहीं सुनी|

 

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