मजबूत इरादे की कहानी

दोस्तों आज मैं आपको एक प्यारी सी बच्ची के मजबूत इरादे की कहानी बताऊंगी जिस तरह से कुदरत की बनाई हुई एक छोटी सी चींटी पहाड़ों की ऊंची चोटी में अपने मजबूत इरादे से चढ जाती है ठीक उसी तरह यह बच्ची अपनी जिंदगी में मजबूत इरादे से अपने मुकाम  को पाती है तो आइए जाने  ये प्यारी कहानी |

कहानी एक छोटी सी 10 साल की बच्ची आनिया की है वह अपने भाई बहनों में तीसरे नंबर पर थी ठीक ही कहते हैं लोग “जब किस्मत किसी को कुछ देता है तो बहुत देता है और किसी से लेता है तो बहुत कुछ लेता है” ठीक उसी तरह कुदरत ने आनिया  को खूबसूरती के साथ-साथ एक इंटेलिजेंट दिमाग भी दिया था|

मजबूत इरादे की कहानी

उसके पापा गवर्मेंट जॉब में थे जिसमें ट्रांसफर वगैरह का बड़ा इशू  रहता है जिस वजह से उसे स्कूल काफी चेंज करने पड़ते थे कई बार ऐसा होता था कि बीच में ट्रांसफर हो जाने की वजह से स्कूल में एडमिशन भी नहीं हो पाते थे | बच्चों की पढ़ाई में डिस्टर्ब देखकर उसके पापा एक जगह परमानेंटली रहने का फैसला करते हैं तभी आनिया 10 साल की थी और स्टैंडर्ड 1  में ही थी उसके पापा पास के ही एक प्राइवेट स्कूल में उसका एडमिशन स्टैंडर्ड सिक्स में आनिया के काफी इंससिस्ट  करने पर करा देते हैं हालांकि वह  एंट्रेंस टेस्ट में क्वालीफाई नहीं कर पाती है लेकिन फिर भी उसके पापा के दोस्त की मदद से उसका एडमिशन हो जाता है |

दरअसल उसकी परेशानी अब जाकर शुरू होती है क्यूँकी स्टैंडर1 का बच्चा स्टैंडर 6 के सब्जेक्ट्स को easily कैसे समझ पाता| अब ना तो उसे मैथ  समझ में आ रहा था और ना ही उसे other subjects समझ आ रहे थे जिसकी वजह से आनिया  अपने क्लास के कमजोर बच्चों में शुमार होने लगी थी उसे कमजोर कहलाना बिल्कुल पसंद नहीं था |

उसने संकल्प लिया और अपने मजबूत इरादे से कठिन परिश्रम करने का निश्चय किया | वह  दिन रात मेहनत करना शुरू कर दि इस मेहनत में उसकी दोस्त भी उसकी मदद कर रही थी| इसी दौरान एक दिन की बात  है आनिया हमेशा की तरह स्कूल के लिए तैयार होकर टाइम से स्कूल जा रही थी रास्ते में उसे अपने क्लास के कुछ क्लासमेट्स मिल गए उनके साथ हो लेती है तभी उनमें से एक बच्चे ने कहा आनिया तुम खुद को स्मार्ट समझती हो “हो तो जीरो खुद को हीरो समझती हो” स्टैंडर 6 में आने को कोन कहा थोड़ी बड़ी होकर नीचे क्लास में पढ़ लेती तो क्या होता|  ठीक है upperclass में आई हो तो अब झेलो और fail होओ ना |

इतना सुनकरआनीय  को गुस्सा आ गया लेकिन वह इसका जवाब अपने बोल से  नहीं देना चाहती थी बल्कि इसका जवाब कुछ करके देना चाहती थी और वह अपने तेज कदमों से जल्दी जल्दी स्कूल की तरफ आगे बढ़ने लगी| क्लास में जब इंग्लिश टीचर जाए तो आनिया  को बहुत डर लग रहा था क्योंकि उसे सब्जेक्ट बराबर से समझ में नहीं आ रहा था और तभी उसके दिल में अचानक से यह बात आई कि उसे तेज बनना है उसे यह सब कुछ सीखना ही होगा क्योंकि मैं कमजोर नहीं और कमजोर बनना नहीं चाहती|

इन्ही thought से वह खुद को धीरे-धीरे इंप्रूव करने लगी पर अनफॉर्चूनेटली वह अपने फर्स्ट टर्म एग्जाम में पास नहीं हो पाती है जिससे उसके क्लासमेट्स उसका मजाक उड़ाने लगते हैं |आनिया  यह सब कुछ देख कर खुद को संभाल नहीं पाती  और बहुत जोर जोर से रोने लगती है |“आखिर वह थी  तो 10 साल की छोटी सी बच्ची ही” रोने की आवाज  सुनकर सभी टीचर्स वहां आ जाते हैं फिर आनिया  से रोने की वजह पूछते हैं |उस की दोस्त सब कुछ अपने टीचर्स को बता देती है|

टीचर उन बच्चों को डांट लगाती हैं और आनिया की तारीफ करती है यह कितनी मजबूत और मेहनती लड़की है जो स्टैंडर्ड वन में थी और उसे स्टैंडर्ड सिक्स में पढ़ने की चाहत थी ऐसा नहीं है कि वह मेहनत नहीं कर रही” पर मेहनत के रंग आने में कुछ वक्त लगते हैं” देखना आनिया एक दिन स्कूल टॉपर बनेगी इतना कहकर उसकी पीठ थपथपाते हुए टीचर चली जाती हैं |

आनिया  के मन में टीचर की यह बात मानो जैसे छप सी गई हो| अब  दिन-रात के मेहनत से वह अपने क्लास में इंप्रूव करने लगी उसके मेहनत को देखकर घर वाले भी समझ गए कि उनकी बेटी एक दिन बड़ा नाम करेगी स्कूल में सभी टीचर्स आनिया  से बहुत खुश रहने लगे थे पढ़ाई के साथ-साथ हर फील्ड में आनिया  अच्छा परफॉर्म कर रही थी|                                           

दोस्तों आपने देखा मेहनत क्या रंग लाती है मेहनत वह ताकत है जिससे बंजर जमीन में सोना उगलने लगता है इसलिए हम सभी को मेहनत करने  से कभी भी जी नहीं चुराना चाहिए फिर से हम अपनी कहानी के तरफ move करते हुए देखते हैं कि आनिया  देखते ही देखते स्टैंडर्ड सिक्स से  स्टैंडर्ड10 में पहुंच चुकी थी एक होनहार स्टूडेंट के रूप में आज टीचर्स की जुबान पर आनिया  का नाम ही होता था  अब वह दिन भी आ गया जब मैट्रिक का एग्जाम होना था मैट्रिक का  एग्जाम बहुत अच्छे से हो गया कुछ ही महीनों में रिजल्ट भी आ गए इंटरनेट पर रिजल्ट आते हैं खुशी की लहर चारों तरफ छा गया सभी बच्चे अच्छा परफॉर्म किए लेकिन आनिया ही स्कूल टॉपर बनी यह देखकर सभी खुश हुए आनिया  के घर में खुशी का माहौल था आनिया भी खुश थी|

लेकिन इसी दौरान प्रिंसिपल का फोन आता है और उन्होंने यह इनफॉर्म किया कि अनिया  स्कूल टॉपर ही नहीं बल्कि स्टेट टॉपर है इतना सुनना था कि आनिया  बेइंतहा जोर जोर से रोने लगती है जैसा कि वह स्टैंडर्ड सिक्स में अपनी बेइज्जती पर रोई थी और यही कहे  जा रही थी कि हमें टीचर ने कहा था कि “तुम्हें स्कूल टॉपर बनना है आज मैं स्टेट टॉपर बन गई”|      देखा मेरे प्यारे दोस्तों मेहनत का फल कितना मीठा होता है इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि हमें हमेशा कड़ी मेहनत करनी चाहिए क्योंकि मेहनत से ही “चटियल मैदान हरियाली से लहलहाने  लगते है” | 

 

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